छत्तीसगढ़। प्रदेश के इतिहास के सबसे चर्चित और भयावह नक्सली हमलों में शामिल 2013 के झीरम घाटी हत्याकांड में जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में विचाराधीन सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोषियों की सजा पर फैसला सुरक्षित रखा गया है और 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी।
मामले की सुनवाई NIA विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत में चल रही थी। लंबे समय तक चली सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बस्तर क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रही थी। इसी दौरान पहले से घात लगाए माओवादियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर भीषण हमला कर दिया था।
इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों की जान चली गई थी। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और ‘बस्तर टाइगर’ के नाम से चर्चित पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी।
यह हमला छत्तीसगढ़ की राजनीति और नक्सल हिंसा के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में गिना जाता है।
12 अगस्त को पूरी हुई थी अंतिम सुनवाई
झीरम घाटी हमले के मामले में विशेष अदालत में 12 अगस्त को अंतिम सुनवाई पूरी हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पहले निर्णय सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 सितंबर कर दिया गया। शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहरा दिया।
करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट
NIA ने विस्तृत जांच के बाद वर्ष 2015 में लगभग एक हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की थी। शुरुआत में इस मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
सुनवाई के दौरान इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई। शेष 10 आरोपी जगदलपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
अभियोजन ने पेश किए 101 गवाह
लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए।
आपके दिए विवरण के अनुसार, बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया।
हमले में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व हुआ था प्रभावित
झीरम घाटी हमला मुख्य रूप से कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाकर किया गया था। इस हमले ने प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व को भारी क्षति पहुंचाई थी।
घटना के बाद से ही इस मामले को लेकर लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी होते रहे हैं। कांग्रेस की ओर से उस समय तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे, जबकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है।
अब करीब 13 साल बाद NIA की विशेष अदालत का फैसला इस बहुचर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है। दोषियों को कितनी सजा मिलेगी, इसका फैसला 16 सितंबर को किया जाएगा।







