कोरबा। छत्तीसगढ़ में वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात पुलिस विभाग की मिनी बस से हुई सड़क दुर्घटना में दो युवकों की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा ने सख्त रुख अपनाया है। पीड़ित परिवारों को 43 लाख 14 हजार 200 रुपये का मुआवजा निर्धारित समय में नहीं मिलने पर न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है।
मामला 27 सितंबर 2023 का है। रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के पिपरिया-परपोड़ी मुख्य मार्ग पर शाम करीब साढ़े छह बजे पुलिस विभाग की मिनी बस ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मार दी थी। हादसे में जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम हेडसपुर निवासी बैजनाथ कंवर और रवि यादव की मौत हो गई थी।
चालक की लापरवाही को माना जिम्मेदार
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा में अलग-अलग प्रकरण प्रस्तुत किए। प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी गरिमा शर्मा ने 14 जनवरी 2026 को दोनों मामलों में फैसला सुनाया।
न्यायालय ने दुर्घटना के लिए मिनी बस चालक की लापरवाही को जिम्मेदार माना। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दुर्घटनाग्रस्त मिनी बस पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ के नाम पर पंजीकृत थी और दुर्घटना के समय वाहन की बीमा अवधि समाप्त हो चुकी थी। इसी आधार पर DGP और कोरबा SP को भी मामले में पक्षकार बनाया गया था।
दो परिवारों को 43.14 लाख रुपये का मुआवजा
न्यायालय ने बैजनाथ कंवर के आश्रितों को 26 लाख 9 हजार 200 रुपये तथा रवि यादव के आश्रितों को 17 लाख 5 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। दोनों मामलों में कुल मुआवजा राशि 43 लाख 14 हजार 200 रुपये निर्धारित की गई। इसके अतिरिक्त निर्धारित राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया था।
अधिकरण ने मुआवजा राशि एक महीने के भीतर पीड़ित परिवारों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। लेकिन आदेश के बावजूद पांच महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी राशि का भुगतान नहीं किया गया।
भुगतान नहीं हुआ तो शुरू हुई कुर्की की कार्रवाई
मुआवजा नहीं मिलने पर पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय में वसूली की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद अधिकरण ने सख्ती दिखाते हुए DGP और कोरबा SP कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है।
बताया गया कि दुर्घटना के समय बैजनाथ कंवर बाइक चला रहा था, जबकि रवि यादव पीछे बैठा था। इसी दौरान वीवीआईपी प्रबंधन ड्यूटी में लगी पुलिस विभाग की मिनी बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बैजनाथ कंवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल रवि यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
परिजनों पर टूटा था आर्थिक संकट
बैजनाथ कंवर के मामले में उनकी पत्नी सुजाता कंवर, माता-पिता और दो नाबालिग बच्चों ने मुआवजे के लिए दावा प्रस्तुत किया था। वहीं रवि यादव की पत्नी जुगमणी और दो नाबालिग बच्चों की ओर से भी न्यायालय में मुआवजे की मांग की गई थी।
अदालत के ताजा आदेश के बाद अब पुलिस विभाग के सामने मुआवजा राशि और ब्याज का भुगतान करने की चुनौती खड़ी हो गई है। न्यायालय की कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह मामला सरकारी वाहनों के बीमा, रखरखाव और दुर्घटना की स्थिति में जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।







