नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया है। उनके सेना छोड़ने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है।
कौन हैं मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल?
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल भारतीय सेना के अधिकारी रहे हैं और उनका सैन्य सफर NDA से शुरू हुआ। उन्होंने 2013 में NDA परीक्षा पास की और इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण लिया। सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जाट रेजिमेंट के साथ सेवा की और बाद में प्रतिष्ठित 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में भी सेवाएं दीं।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया, जब मार्च 2023 में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ADC नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति के ADC के रूप में वे कई महत्वपूर्ण आधिकारिक कार्यक्रमों और विदेश यात्राओं के दौरान उनके साथ नजर आए।
राष्ट्रपति के साथ तस्वीरों से हुए लोकप्रिय
राष्ट्रपति मुर्मू के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों में मेजर सांब्याल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए। गणतंत्र दिवस सहित कई मौकों पर उनकी अनुशासित और प्रभावशाली मौजूदगी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। सोशल मीडिया पर उन्हें कुछ समय के लिए ‘नेशनल क्रश’ तक कहा गया।
आखिर क्यों छोड़ी सेना?
मेजर ऋषभ सांब्याल ने खुद अपने फैसले को लेकर भावुक होकर बताया कि सेना की वर्दी पहनना उनका बचपन का सपना था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इसे उतारना पड़ेगा।
उन्होंने सेना छोड़ने के पीछे पारिवारिक और निजी जिम्मेदारियों को वजह बताया। उनके अनुसार, जिंदगी में कुछ परिस्थितियां ऐसी आती हैं जो इंसान की दिशा बदल देती हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने इस फैसले पर काफी समय तक विचार किया और परिवार ने भी उनके निर्णय का समर्थन किया।
शादी नहीं है इस्तीफे की वजह
मेजर सांब्याल के सेना छोड़ने को लेकर सोशल मीडिया पर शादी समेत कई तरह की अटकलें लगाई गईं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि फिलहाल शादी करने का उनका कोई प्लान नहीं है। इसलिए सेना छोड़ने को शादी से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
सेना के बाद क्या करेंगे?
सेना से विदाई के बावजूद मेजर सांब्याल ने संकेत दिया है कि वह आगे भी युवाओं को प्रेरित करने और देश के विकास में योगदान देने की दिशा में काम करना चाहते हैं। उन्होंने अपने जीवन के अगले अध्याय को लेकर सकारात्मक रुख जाहिर किया है।
मेजर ऋषभ सांब्याल का सेना से सफर भले ही समय से पहले खत्म हुआ हो, लेकिन उनके अपने शब्दों में यह देशसेवा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है।







