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IPS रतनलाल डांगी प्रकरण में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश

तय समय में जवाब नहीं देने पर अधिकारी को कोर्ट में होना पड़ सकता है उपस्थित

IPS रतनलाल डांगी प्रकरण में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश
बिलासपुर ( VOICE RA NEWS) 
बिलासपुर निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जवाब नहीं आने की स्थिति में ऑफिसर-इन-चार्ज को अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा।
याचिका के अनुसार, पीड़िता योगा टीचर हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रतनलाल डांगी ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे योग सीखना शुरू किया। कुछ समय बाद कथित तौर पर उन्होंने पीड़िता के व्हाट्सऐप नंबर पर अश्लील संदेश भेजना शुरू कर दिया।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वीडियो कॉल के दौरान आईपीएस डांगी अश्लील व्यवहार करते थे। विरोध करने पर उन्हें धमकियां भी दी गईं। आरोप है कि पीड़िता और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा उनके पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी दी गई।
इस मामले को लेकर पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
इसके बाद पीड़िता ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़िता ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि शिकायत की जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जा रही है, जिनकी भूमिका को लेकर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी मामले में आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि IG आनंद छाबड़ा के खिलाफ महादेव सट्टा एप मामले में आपराधिक प्रकरण विचाराधीन है। ऐसे में उन्हें इस संवेदनशील मामले की जांच की जिम्मेदारी दिया जाना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में रतनलाल डांगी से संबंधित कथित अवैध चल-अचल संपत्तियों की जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की थी। शिकायत में छत्तीसगढ़ के रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा, बिलासपुर सहित राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कथित संपत्तियों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारियों द्वारा इन संपत्तियों से संबंधित शिकायत की उचित जांच नहीं की गई।
Hemant Kumar
VOICE RA REPORTER

Hemant Kumar

संवाददाता, VOICE RA

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