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CCTV को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- नई योजना का इंतजार न करें, मौजूदा फंड से सुधारें व्यवस्था

नई पुलिस आधुनिकीकरण योजना का इंतजार नहीं, ASUMP के उपलब्ध ₹450 करोड़ से CCTV व्यवस्था सुधारने पर जोर

CCTV को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- नई योजना का इंतजार न करें, मौजूदा फंड से सुधारें व्यवस्था
नई दिल्ली ( VOICE RA NEWS) सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस स्टेशनों में कार्यशील CCTV कैमरों की कमी से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नई पुलिस आधुनिकीकरण योजना के इंतज़ार में मौजूदा फंड को बेकार नहीं पड़ा रहने दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र से कहा कि ASUMP (Assistance to States and UTs for Modernisation of Police) योजना के तहत पहले से उपलब्ध राशि का इस्तेमाल पुलिस स्टेशनों में CCTV इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने और मौजूदा सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए किया जाए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जब मौजूदा योजना के तहत फंड उपलब्ध है, तो नई योजना के लागू होने तक इंतज़ार करने की जरूरत नहीं है। जस्टिस संदीप मेहता ने केंद्र से यह भी पूछा कि उपलब्ध राशि को राज्यों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र को इस संबंध में आगे निर्देश लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

केंद्र सरकार के 31 अगस्त 2026 के हलफनामे के अनुसार, 1 अगस्त 2026 तक ASUMP के तहत ₹450 करोड़ उपलब्ध थे, जिनमें से ₹225 करोड़ का इस्तेमाल किया जा चुका था। वहीं, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से CCTV से जुड़े कुल प्रस्ताव लगभग ₹1,453.85 करोड़ के थे। इनमें से ₹484.03 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जबकि कई प्रस्तावों पर अभी विचार चल रहा है या उन्हें BPR&D के मानकों और अन्य कारणों के चलते मंजूरी नहीं मिली है।

मामले में झारखंड की CCTV व्यवस्था को लेकर भी गंभीर मुद्दा सामने आया। राज्य ने सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों के लिए सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड और मॉनिटरिंग सिस्टम हेतु करीब ₹112.50 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र के अनुसार यह प्रस्ताव BPR&D के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। कोर्ट ने केंद्र से झारखंड की स्थिति और मामले में उठाई गई आपत्तियों पर स्पष्ट जानकारी लेकर आने को कहा है। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने यह भी बताया कि झारखंड में 2020 से CCTV लगाने को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी बीच केंद्र सरकार Police Modernisation Mission (PMM) नामक नई व्यापक योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना का बजट पांच वर्षों के लिए करीब ₹24,000 करोड़ बताया गया है और केंद्र ने कहा है कि इसमें पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि नई योजना आने तक मौजूदा CCTV व्यवस्था और उसकी कमियों को नजरअंदाज न किया जाए।

यह मामला केवल पुलिस आधुनिकीकरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि पुलिस स्टेशनों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है। अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार उपलब्ध ASUMP फंड के इस्तेमाल और राज्यों की लंबित CCTV जरूरतों को लेकर अगली सुनवाई में क्या कदम उठाती है।

📌Case Title – In Re: Lack of Functional CCTVs in Police Stations

आपकी राय क्या है? क्या देश के हर पुलिस स्टेशन में CCTV कैमरों की 24×7 कार्यशील व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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Hemant Kumar
VOICE RA REPORTER

Hemant Kumar

संवाददाता, VOICE RA

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